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1 राजा १४:२१-३०

1 राजा १४:२१-३०

२१
इस समय यहूदिया का शासक था शलोमोन का पुत्र रिहोबोयाम. जिस समय उसने शासन शुरू किया, उसकी उम्र एकतालीस साल की थी. येरूशलेम में उसने सत्रह साल शासन किया. येरूशलेम वह नगर है, जिसे याहवेह ने सारे इस्राएल में से इसलिये चुना, कि इसमें अपना नाम की प्रतिष्ठा करें. उसकी माता का नाम था नामाह जो अम्मोनी थी.
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यहूदिया प्रदेश ने वह किया, जो याहवेह की नज़रों में गलत था. उन्होंने अपने पापों के द्वारा याहवेह में इतनी जलन पैदा कर दी, जितनी उनके किसी भी पूर्वज ने कभी न की थी.
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उन्होंने भी अपने लिए पूजा की जगह, हर एक ऊंची पहाड़ी और हर एक घने पेड़ के नीचे पूजा-स्तम्भ और अशेराह के खंभे बनवाए थे.
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देश में पुरुषगामियों के लिए पुरुष वेश्या भी मंदिरों में रखे गए थे. ये सब उन सारे घृणित कामों में संलग्न थे, जो उन जातियों में किए जाते थे, जिन्हें याहवेह ने इस्राएल के सामने से भगा दिया था.
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राजा रिहोबोयाम के शासनकाल के पांचवें साल में मिस्र के राजा शिशाक ने येरूशलेम पर हमला कर दिया.
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उसने याहवेह के भवन से और राजा का महल में से सारा कीमती सामान लूट लिया. वह सभी कुछ अपने साथ ले गया, यहां तक कि शलोमोन द्वारा गढ़ी गई सारी सोने की ढालें भी.
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तब राजा रिहोबोयाम ने उनकी जगह पर कांसे में गढ़ी गई ढालें वहां रख दीं. इनकी जवाबदारी रिहोबोयाम ने राजघराने के पहरेदारों के प्रधान को सौंप दी.
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तब रीति यह बन गई कि जब-जब राजा याहवेह के भवन को जाता था, पहरेदार ये ढालें लेकर चलते थे और राजा के वहां से लौटने पर इन्हें पहरेदारों के कमरों में दोबारा रख दिया जाता था.
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रिहोबोयाम के बाकी काम और उसके सारे कृत्य यहूदिया के राजाओं की इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं.
३०
रिहोबोयाम और यरोबोअम हमेशा ही आपस में युद्ध करते रहे.
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