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circa 1446–1406 BC

The Wilderness Years

Forty years of wandering in the desert test Israel's faith and prepare a new generation to enter the promised land.

2,247 वचन · 2 पुस्तकें शामिल

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. व्यवस्था २८:१९लगभग १४५१ ई.पू.

    शापित होगा तुम्हारा कूच और तुम्हारा लौटकर आना.

  2. व्यवस्था २८:२०लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे सारे कामों में तुम्हारे कामों के दुराचार और तुम्हारे द्वारा याहवेह का त्याग किए जाने के कारण याहवेह तुम पर शाप, डर और कुंठा डाल देंगे, कि तुम नाश हो जाओ और तेजी से तुम्हारा विनाश हो जाए.

  3. व्यवस्था २८:२१लगभग १४५१ ई.पू.

    याहवेह तुम पर महामारी सम्बद्ध कर देंगे, जब तक वह तुम्हें उस देश से नाश न कर दें, जिसमें अधिकार करने के लिये तुम उसमें प्रवेश कर रहे हो.

  4. व्यवस्था २८:२२लगभग १४५१ ई.पू.

    याहवेह तुम पर क्षय रोग, बुखार, सूजन, बड़ी जलन और तलवार का प्रहार प्रभावी करेंगे, जब तक तुम मिट न जाओ.

  5. व्यवस्था २८:२३लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे सिर के ऊपर विशाल आकाश कांसे और पांवों के नीचे की धरती लोहा हो जाएगी.

  6. व्यवस्था २८:२४लगभग १४५१ ई.पू.

    याहवेह, तुम पर बालू और धूल की बारिश करेंगे; ये आकाश से तुम पर ये तब तक बरसते रहेंगे जब तक तुम नाश न हो जाओ.

  7. व्यवस्था २८:२५लगभग १४५१ ई.पू.

    याहवेह, ऐसा करेंगे, कि तुम अपने शत्रुओं द्वारा हरा दिए जाओगे. उन पर हमला करने तो तुम एक मार्ग से जाओगे, मगर तुम सात दिशाओं में पलायन करोगे. सारी पृथ्वी के राज्यों के लिए तुम आतंक का पर्याय हो जाओगे.

  8. व्यवस्था २८:२६लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे शव आकाश के सारे पक्षियों और पृथ्वी के पशुओं का आहार हो जाएंगे और उन्हें खदेड़ने के लिए वहां कोई भी न रहेगा.

  9. व्यवस्था २८:२७लगभग १४५१ ई.पू.

    मिस्र देश के समान याहवेह तुम पर फोड़ों, बतौरियों का वार करेंगे और उसके अलावा चकत्ते और खुजली का भी, जिनसे तुम्हें छुड़ौती प्राप्‍त हो ही न सकेगी.

  10. व्यवस्था २८:२८लगभग १४५१ ई.पू.

    याहवेह तुम पर पागलपन, अंधेपन और हृदय की घबराहट का वार कर देंगे.

  11. व्यवस्था २८:२९लगभग १४५१ ई.पू.

    परिणामस्परूप तुम दिन-दोपहरी टटोलते रहोगे, जिस प्रकार अंधा टटोलता रहता है. तुम्हारे कामों से तुम्हें कोई लाभ न मिलेगा, बल्कि तुम लगातार उत्पीड़ित भी किए जाओगे और लूटते जाओगे, मगर वहां तुम्हारी रक्षा के लिए कोई भी न रह जाएगा.

  12. व्यवस्था २८:३०लगभग १४५१ ई.पू.

    जिस कन्या से तुम्हारी सगाई होगी, कोई अन्य पुरुष शीलभंग करेगा; तुम अपने घर का निर्माण तो करोगे, मगर उसमें निवास न कर सकोगे. तुम अंगूर के बगीचे तो लगाओगे मगर अंगूरों का उपभोग न कर सकोगे.

  13. व्यवस्था २८:३१लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे बछड़े का वध तुम्हारे सामने तो होगा मगर तुम उसका उपभोग न कर सकोगे. तुम्हारा गधा तुमसे छीन लिया जाएगा. और तुम उसे पुनः प्राप्‍त न कर सकोगे. तुम्हारी भेड़ें तुम्हारे शत्रुओं की संपत्ति हो जाएंगी और कोई भी तुम्हारी रक्षा के लिए वहां न रहेगा.

  14. व्यवस्था २८:३२लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे पुत्र-पुत्रियां तुम्हारे देखते-देखते बंधुआई में चले जाएंगे और तुम हमेशा उनकी लालसा करते रह जाओगे, मगर इसके लिए तुम कुछ भी न कर सकोगे.

  15. व्यवस्था २८:३३लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारी भूमि का उत्पाद विदेशियों का आहार हो जाएगा और तुम आजीवन उत्पीड़ित और दमित किए जाते रहोगे.

  16. व्यवस्था २८:३४लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे सामने जो कुछ आएगा उसे देख तुम विक्षिप्‍त हो जाओगे.

  17. व्यवस्था २८:३५लगभग १४५१ ई.पू.

    याहवेह तुम्हारे पैरों और घुटनों में ऐसे पीड़ादायक फोड़े उत्पन्‍न कर देंगे, जिनसे तुम स्वस्थ नहीं हो सकोगे, वस्तुतः तुम सिर से पांव तक घावों से भर जाओगे.

  18. व्यवस्था २८:३६लगभग १४५१ ई.पू.

    याहवेह तुम्हें और उस राजा को, जो तुम्हारे द्वारा प्रतिष्ठित किया गया होगा, एक ऐसे राष्ट्र में भेज देंगे, जिसे न तो तुम जानते हो और न ही जिसे तुम्हारे पूर्वजों ने जाना था. उस राष्ट्र में तुम काठ और पत्थर की मूर्तियों की सेवा-उपासना करोगे.

  19. व्यवस्था २८:३७लगभग १४५१ ई.पू.

    तब तुम उन लोगों के बीच, जिनके बीच में याहवेह तुम्हें हकाल देंगे, भय, लोकोक्ति और उपहास का विषय होकर रह जाओगे.

  20. व्यवस्था २८:३८लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम विपुल बीज बोओगे, मगर फसल काटने के अवसर पर तुम बहुत अल्प एकत्र कर सकोगे, क्योंकि टिड्डियां इसे चट कर जाएंगी.

  21. व्यवस्था २८:३९लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम द्राक्षा उद्यानों का रोपण और कृषि ज़रूर करोगे, मगर तुम न तो द्राक्षा एकत्र कर सकोगे और न ही द्राक्षारस का सेवन कर सकोगे, इन्हें कीट चट कर जाएंगे.

  22. व्यवस्था २८:४०लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे देश की सारी सीमा में ज़ैतून वृक्ष तो होंगे, मगर तुम ज़ैतून तेल का प्रयोग अभ्यंजन के लिए नहीं कर सकोगे, क्योंकि ज़ैतून फलों का अवपात हो जाएगा.

  23. व्यवस्था २८:४१लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे पुत्र-पुत्रियां पैदा ज़रूर होंगे, मगर वे तुम्हारे होकर न रह सकेंगे, क्योंकि उन्हें बन्दीत्व में ले जाया जाएगा.

  24. व्यवस्था २८:४२लगभग १४५१ ई.पू.

    कीट तुम्हारे सारे वृक्षों और भूमि की उपज में समा जाएंगे.

  25. व्यवस्था २८:४३लगभग १४५१ ई.पू.

    तुम्हारे बीच प्रवास कर रहा विदेशी तुमसे अधिक उन्‍नत होता जाएगा, मगर खुद तुम्हारा ह्रास ही ह्रास होता चला जाएगा.