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circa 1446 BC

Moses & The Exodus

God raises up Moses to confront Pharaoh; the ten plagues culminate in Israel's dramatic deliverance from four centuries of bondage.

415 वचन · 1 पुस्तक शामिल

  1. निर्गमन ६:२८लगभग १४९१ ई.पू.

    जिस दिन याहवेह ने मिस्र देश में मोशेह से बात की,

  2. निर्गमन ६:२९लगभग १४९१ ई.पू.

    और कहा, “मैं ही याहवेह हूं. और जो कुछ मैं तुमसे कहता हूं, वह सब तुम मिस्र देश के राजा फ़रोह से कहना.”

  3. निर्गमन ६:३०लगभग १४९१ ई.पू.

    लेकिन मोशेह ने याहवेह से कहा, “मैं अच्छी तरह बोल नहीं सकता; फ़रोह मेरी बात क्यों सुनेगा?”

  4. निर्गमन ७:१लगभग १४९१ ई.पू.

    यह सुनकर याहवेह ने मोशेह से कहा, “अब देखना कि मैं तुम्हें कैसे फ़रोह के सामने ईश्वर-समान बना देता हूं. और तुम्हारा भाई अहरोन तुम्हारा प्रवक्ता होगा.

  5. निर्गमन ७:२लगभग १४९१ ई.पू.

    जो जो बात मैं तुम्हें बताऊंगा, वह सब बात तुम अहरोन से कहना और अहरोन वही सब फ़रोह से कह देगा, तब फ़रोह इस्राएलियों को अपने देश से जाने देगा.

  6. निर्गमन ७:३लगभग १४९१ ई.पू.

    लेकिन मैं फ़रोह के मन को कठोर बना दूंगा, ताकि मैं मिस्र देश में और ज्यादा चिन्ह और अद्भुत काम कर सकूं.

  7. निर्गमन ७:४लगभग १४९१ ई.पू.

    फिर भी फ़रोह उन सब बातों पर ध्यान नहीं देगा. तब मैं मिस्र देश को बड़ा कष्ट और दंड दूंगा और मिस्र से इस्राएल के लोगों को बाहर निकालूंगा.

  8. निर्गमन ७:५लगभग १४९१ ई.पू.

    मिस्र के लोग यह जान जाएंगे कि मैं ही याहवेह हूं, जिसने मिस्र देश पर अपना हाथ बढ़ाया है और मैंने ही इस्राएलियों को उसके बीच से निकाला है.”

  9. निर्गमन ७:६लगभग १४९१ ई.पू.

    तब मोशेह एवं अहरोन ने ऐसा ही किया—जैसा याहवेह ने उनसे कहा था.

  10. निर्गमन ७:७लगभग १४९१ ई.पू.

    जब मोशेह और अहरोन फ़रोह के पास गए, तब मोशेह की उम्र अस्सी वर्ष तथा अहरोन की तेरासी वर्ष थी.

  11. निर्गमन ७:८लगभग १४९१ ई.पू.

    तब याहवेह ने मोशेह तथा अहरोन को यह आदेश दिया,

  12. निर्गमन ७:९लगभग १४९१ ई.पू.

    “जब फ़रोह तुमसे चमत्कार दिखाने को कहे, तब तुम अहरोन से कहना, ‘अपनी लाठी फ़रोह के सामने डाल दे, ताकि वह सांप बन जाए.’ ”

  13. निर्गमन ७:१०लगभग १४९१ ई.पू.

    इसलिये मोशेह तथा अहरोन फ़रोह के पास गए और ठीक वही किया, जो याहवेह ने कहा था. अहरोन ने अपनी लाठी फ़रोह एवं उसके सेवकों के सामने डाल दी और वह सांप बन गई.

  14. निर्गमन ७:११लगभग १४९१ ई.पू.

    यह देख फ़रोह ने भी पंडितों तथा ओझों को बुलवाया और मिस्र देश के जादूगरों ने भी वैसा ही किया.

  15. निर्गमन ७:१२लगभग १४९१ ई.पू.

    उन सबने अपनी-अपनी लाठी फेंकी जो सांप बन गईं. पर अहरोन की लाठी ने उन सभी की लाठियों को निगल लिया.

  16. निर्गमन ७:१३लगभग १४९१ ई.पू.

    इससे फ़रोह का मन और कठोर हो गया और उसने उनकी बात नहीं मानी, जैसा ही याहवेह ने कहा था.

  17. निर्गमन ७:१४लगभग १४९१ ई.पू.

    तब याहवेह ने मोशेह से कहा, “फ़रोह का मन बहुत कठोर हो गया है, वह लोगों को जाने नहीं देगा.

  18. निर्गमन ७:१५लगभग १४९१ ई.पू.

    सुबह जब फ़रोह नदी की ओर जाएगा, तब तुम नदी पर उनसे मिलना और तुम्हारे हाथ में वही लाठी रखना, जो सांप बन गई थी.

  19. निर्गमन ७:१६लगभग १४९१ ई.पू.

    तुम फ़रोह से यह कहना ‘याहवेह ने, जो इब्रियों के परमेश्वर हैं, मुझे तुमको यह कहने के लिए भेजा है कि मेरे लोगों को जाने दो कि वे निर्जन प्रदेश में जाकर मेरी आराधना कर सकें; लेकिन अभी तक तुमने यह बात नहीं मानी है.

  20. निर्गमन ७:१७लगभग १४९१ ई.पू.

    याहवेह ने यह कहा है कि तुम जान जाओगे कि मैं ही याहवेह हूं, तुम देखना कि नदी के जल पर मैं इस लाठी से, जो मेरे हाथ में है, मारूंगा और पानी खून बन जाएगा.

  21. निर्गमन ७:१८लगभग १४९१ ई.पू.

    और उसमें सब मछलियां मर जायेंगी और नदी से बदबू आएगी और मिस्र के लोग नील नदी से पानी नहीं पी पायेंगे.’ ”

  22. निर्गमन ७:१९लगभग १४९१ ई.पू.

    फिर याहवेह ने मोशेह से कहा, “अहरोन से यह कहो: ‘अपनी लाठी मिस्र देश की नदियों, नालों, तालाबों और जल-कुं‍डों की ओर बढ़ाए ताकि सारा पानी लहू बन जाये—चाहे पानी बर्तन में हो या पत्थर के पात्र में.’ ”

  23. निर्गमन ७:२०लगभग १४९१ ई.पू.

    मोशेह तथा अहरोन ने वैसा ही किया, जैसा याहवेह ने उनसे कहा. उन्होंने लाठी उठाई और नील नदी के जल पर मारा. फ़रोह एवं उसके सेवक यह सब देख रहे थे. एकदम नील नदी का पूरा पानी लहू बन गया.

  24. निर्गमन ७:२१लगभग १४९१ ई.पू.

    नील नदी में जो मछलियां थी, मर गईं. नदी में इतनी दुर्गंध थी कि मिस्र के लोग नील नदी का पानी नहीं पी सकते थे. पूरे मिस्र देश में रक्त फैल गया.

  25. निर्गमन ७:२२लगभग १४९१ ई.पू.

    अपने तंत्र मंत्र से मिस्र के जादूगरों ने भी यही कर दिखाया; तौभी फ़रोह का मन और कठोर हो गया और उसने उनकी बात नहीं मानी.