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योहन १३:१-३०

योहन १३:१-३०

१
फ़सह उत्सव के पूर्व ही मसीह येशु यह जानते थे कि उनका संसार को छोड़कर पिता परमेश्वर के पास लौट जाने का समय पास आ गया है. मसीह येशु उनसे हमेशा प्रेम करते रहे, जो संसार में उनके अपने थे किंतु अब उन्होंने उनसे अंत तक वैसा ही प्रेम रखा.
२
शिमओन के पुत्र कारियोतवासी यहूदाह के मन में शैतान यह विचार डाल चुका था कि वह मसीह येशु के साथ धोखा करे.
३
भोज के समय मसीह येशु ने भली-भांति यह जानते हुए कि पिता ने सब कुछ उनके हाथ में कर दिया है और यह भी, कि वह परमेश्वर की ओर से आए हैं और परमेश्वर के पास लौट रहे हैं,
४
भोजन की मेज़ से उठकर अपने बाहरी कपड़े उतारे, कमर में अंगोछा बांध लिया
५
और एक बर्तन में जल उंडेलकर शिष्यों के पांव धोने और कमर में बंधे अंगोछे से पोंछने लगे.
६
जब वह शिमओन पेतरॉस के पास आए तो पेतरॉस ने उनसे कहा, “प्रभु, आप मेरे पांव धोएंगे?”
७
मसीह येशु ने उत्तर दिया, “जो मैं कर रहा हूं, तुम उसे इस समय नहीं, कुछ समय बाद समझोगे.”
८
पेतरॉस ने कहा, “नहीं, प्रभु, आप मेरे पांव कभी भी न धोएंगे.” “यदि मैं तुम्हारे पांव न धोऊं तो तुम्हारा मेरे साथ कोई संबंध नहीं रह जाएगा,” मसीह येशु ने कहा.
९
इस पर शिमओन पेतरॉस ने मसीह येशु से कहा, “प्रभु, तब तो मेरे पांव ही नहीं, हाथ और सिर भी धो दीजिए.”
१०
मसीह येशु ने कहा, “जो स्‍नान कर चुका है, वह पूरी तरह साफ़ हो चुका है, उसे ज़रूरत है मात्र पांव धोने की; तुम लोग साफ़ हो परंतु सबके सब साफ़ नहीं.”
११
मसीह येशु यह जानते थे कि कौन उनके साथ धोखा कर रहा है, इसलिये उन्होंने यह कहा: “परंतु सबके सब साफ़ नहीं.”
१२
जब मसीह येशु शिष्यों के पांव धोकर, अपने बाहरी कपड़े दोबारा पहनकर भोजन के लिए बैठ गए, तो उन्होंने शिष्यों से कहा, “तुम समझ रहे हो कि मैंने तुम्हारे साथ यह क्या किया है?
१३
तुम लोग मुझे ‘गुरु’ और ‘प्रभु,’ कहते हो, सही ही है—क्योंकि मैं वह हूं.
१४
इसलिये यदि मैंने, ‘प्रभु’ और ‘गुरु’ होकर भी तुम्हारे पांव धोए हैं, तो सही है कि तुम भी एक दूसरे के पांव धोओ.
१५
मैंने तुम्हारे सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है—तुम भी वैसा ही करो, जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया है.
१६
मैं तुम पर यह अटल सच्चाई प्रकट कर रहा हूं: दास अपने स्वामी से बढ़कर नहीं होता और न ही कोई भेजा हुआ दूत अपने भेजनेवाले से.
१७
ये सब तो तुम जानते ही हो. सुखद होगा तुम्हारा जीवन यदि तुम इनका पालन भी करो.
१८
“मैं तुम सबके विषय में नहीं कह रहा हूं—मैं जानता हूं कि मैंने किन्हें चुना है. मैं यह इसलिये कह रहा हूं कि पवित्र शास्त्र का यह लेख पूरा हो: जो मेरी रोटी खाता है, उसी ने मुझ पर लात उठाई है.
१९
“यह सब घटित होने के पूर्व ही मैं तुम्हें बता रहा हूं कि जब ये सब घटित हो तो तुम विश्वास करो कि वह मैं ही हूं.
२०
मैं तुम पर यह अटल सच्चाई प्रकट कर रहा हूं: जो मेरे किसी भी भेजे हुए को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है और जो मुझे ग्रहण करता है, मेरे भेजनेवाले को ग्रहण करता है.”
२१
यह कहते-कहते मसीह येशु आत्मा में व्याकुल हो उठे. उन्होंने कहा, “मैं तुम पर यह अटल सच्चाई प्रकट कर रहा हूं: तुममें से एक मेरे साथ धोखा करेगा.”
२२
शिष्य संदेह में एक दूसरे को देखने लगे कि गुरु यह किसके विषय में कह रहे हैं.
२३
एक शिष्य, जो मसीह येशु का विशेष प्रियजन था, उनके अत्यंत पास बैठा था;
२४
शिमओन पेतरॉस ने उससे संकेत से पूछा, “प्रभु ऐसा किसके विषय में कह रहे हैं?”
२५
उस शिष्य ने मसीह येशु से पूछा, “कौन है वह, प्रभु?”
२६
मसीह येशु ने उत्तर दिया, “जिसे मैं यह रोटी डुबोकर दूंगा, वह.” तब उन्होंने रोटी शिमओन के पुत्र कारियोतवासी यहूदाह को दे दी.
२७
टुकड़ा लेते ही उसमें शैतान समा गया. मसीह येशु ने उससे कहा. “तुम्हें जो कुछ करना है, शीघ्र करो.”
२८
भोजन पर बैठे किसी भी शिष्य को यह मालूम न हो पाया कि उन्होंने यह उससे किस मतलब से कहा था.
२९
कुछ ने यह समझा कि मसीह येशु उससे कह रहे हैं कि जो कुछ हमें पर्व के लिए चाहिए, शीघ्र मोल लो या गरीबों को कुछ दे दो क्योंकि यहूदाह के पास धन की थैली रहती थी.
३०
इसलिये यहूदाह तत्काल बाहर चला गया. वह रात का समय था.

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