योहन १:१-१४
१
आदि में वचन था, वचन परमेश्वर के साथ था और वचन परमेश्वर था.
२
यही वचन आदि में परमेश्वर के साथ था.
३
सारी सृष्टि उनके द्वारा उत्पन्न हुई. सारी सृष्टि में कुछ भी उनके बिना उत्पन्न नहीं हुआ.
४
जीवन उन्हीं में था और वह जीवन मानव जाति की ज्योति था.
५
वह ज्योति अंधकार में चमकती रही. अंधकार उस पर प्रबल न हो सका.
६
परमेश्वर ने योहन नामक एक व्यक्ति को भेजा
७
कि वह ज्योति को देखें और उसके गवाह बनें कि लोग उनके माध्यम से ज्योति में विश्वास करें.
८
वह स्वयं ज्योति नहीं थे किंतु ज्योति की गवाही देने आए थे.
९
वह सच्ची ज्योति, जो हर एक व्यक्ति को प्रकाशित करती है, संसार में आने पर थी.
१०
वह संसार में थे और संसार उन्हीं के द्वारा बनाया गया फिर भी संसार ने उन्हें न जाना.
११
वह अपनी सृष्टि में आए किंतु उनके अपनों ने ही उन्हें ग्रहण नहीं किया.
१२
परंतु जितनों ने उन्हें ग्रहण किया अर्थात् उनके नाम में विश्वास किया, उन सबको उन्होंने परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दिया;
१३
जो न तो लहू से, न शारीरिक इच्छा से और न मानवीय इच्छा से, परंतु परमेश्वर से पैदा हुए हैं.
१४
वचन ने शरीर धारण कर हमारे मध्य तंबू के समान वास किया और हमने उनकी महिमा को अपना लिया—ऐसी महिमा को, जो पिता के एकलौते पुत्र की होती है—अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण.
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