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होशेआ १०:१-८

होशेआ १०:१-८

इस्राएल एक बढ़ने वाली अंगूर की लता थी; वह अपने लिये फल देती थी. जैसे जैसे उसके फल बढ़ते गये, उसने और ज्यादा वेदियां बनाई; जैसे जैसे उसका देश समृद्ध होता गया, उसने अपने पवित्र पत्थरों को सजाया.
उनका हृदय धोखेबाज है, और अब वे ज़रूर दंड भोगेंगे. याहवेह उनकी वेदियों को ढहा देंगे और उनके पवित्र पत्थरों को नष्ट कर देंगे.
तब वे कहेंगे, “हमारा कोई राजा नहीं है क्योंकि हमने याहवेह का आदर नहीं किया. पर यदि हमारा कोई राजा होता भी, तो वह हमारे लिये क्या करता?”
वे बहुत सी प्रतिज्ञाएं करते हैं, झूठी शपथ खाते हैं और सहमति बनाते हैं; इसलिये हल चलाये गये खेत में उगे जहरीले घास-पात के समान मुकदमे होने लगते हैं.
जो लोग शमरिया में रहते हैं वे बेथ-आवेन के बछड़े के कारण डरते हैं. इसके लोग इस पर विलाप करेंगे, और ऐसा ही इसके मूर्तिपूजक पुरोहित भी करेंगे, जो पहले इसके वैभव पर आनंदित हुआ करते थे, क्योंकि इसे उनसे छीनकर बंधुआई में ले लिया गया है.
इसे बड़े राजा को भेंट स्वरूप देने के लिये अश्शूर ले जाया जाएगा. एफ्राईम लज्जित किया जाएगा; इस्राएल भी बाहरी लोगों से नाता के कारण लज्जित होगा.
शमरिया के राजा को ऐसे नष्ट किया जाएगा, जैसे एक छोटी शाखा पानी के बहाव में बहकर नष्ट हो जाती है.
बुराई के ऊंचे स्थान नष्ट किए जाएंगे— यह इस्राएल का पाप है. उनकी इन वेदियों पर कंटीले पौधे और झाड़ियां उगकर उनकी वेदियों को ढांप लेंगी. तब वे पर्वतों से कहेंगे, “हमें ढांप लो!” और पहाड़ियों से कहेंगे, “हम पर आ गिरो!”
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