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1 राजा ४:२०-२८

राज्य की समृद्धि और विस्तार

1 राजा ४:२०-२८
२०
यहूदिया और इस्राएल में जनसंख्या समुद्र के किनारे की रेत के समान अनगिनत थी. प्रजा सुख समृद्धि में रह रही थी.
२१
शलोमोन की प्रभुता फरात नदी के पश्चिम की ओर से लेकर फिलिस्तीनियों के देश तक और मिस्र देश की सीमाओं तक सारे राज्यों पर हो गयी थी. ये सभी शलोमोन के पूरे जीवन भर उन्हें भेंट भेजते रहे और उनकी सेवा करते रहे.
२२
शलोमोन के राजपरिवार में प्रतिदिन के भोजन में पांच हज़ार किलो मैदा; दस हज़ार किलो आटा
२३
दस हष्ट-पुष्ट बछड़ों का मांस, मैदानों में पाले गये बीस बैल, सौ भेड़ों और इन सबके अलावा हिरण, चिंकारों और यखमूरों और हष्ट-पुष्ट पक्षियों का मांस हुआ करता था.
२४
फरात नदी के पश्चिम में हर जगह शलोमोन की प्रभुता थी, तिफ़साह से अज्जाह तक, फरात नदी के पश्चिम के सभी राजाओं पर. पूरे राज्य में चारों ओर शांति बनी हुई थी.
२५
यहूदिया और इस्राएल पूरी तरह सुरक्षित थे. दान से बेअरशेबा तक हर एक व्यक्ति शलोमोन के पूरे जीवन भर में अपने अंगूरों और अंजीरों को खाते थे.
२६
शलोमोन की घुड़शाला में चालीस हज़ार घोड़े उनके रथों के इस्तेमाल के लिए थे, जिनके लिए बारह हज़ार घुड़सवार चुने गए थे.
२७
ठहराए गए महीने के लिए नियुक्त अधिकारी राजा शलोमोन के लिए ज़रूरी चीज़ों का प्रबंध करते थे, कि शलोमोन और उनके मेहमानों के सामने भोजन परोसा जाता रहे—कमी किसी चीज़ की नहीं होती थी.
२८
घोड़ों और तेज चलनेवाले घोड़ों के भोजन के लिए जौ और चारे का इंतजाम करना भी इन्हीं की जवाबदारी थी. वे ज़रूरत के अनुसार ये सब पूरा कर देते थे.

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