Skip to content
प्रकाशन ३:१५-२१

प्रकाशन ३:१५-२१

१५
मैं तुम्हारे कामों से परिचित हूं—तुम न तो ठंडे हो और न गर्म—उत्तम तो यह होता कि तुम ठंडे ही होते या गर्म ही.
१६
इसलिये कि तुम कुनकुने हो; न गर्म, न ठंडे, मैं तुम्हें अपने मुख से उगलने पर हूं.
१७
तुम्हारा तो यह दावा है, मैं धनी हूं, मैं समृद्ध हो गया हूं तथा मुझे कोई कमी नहीं है, किंतु तुम नहीं जानते कि वास्तव में तुम तुच्छ, अभागे, अंधे तथा नंगे हो.
१८
तुम्हारे लिए मेरी सलाह है कि तुम मुझसे आग में शुद्ध किया हुआ सोना मोल लो कि तुम धनवान हो जाओ; मुझसे सफ़ेद वस्त्र लेकर पहन लो कि तुम अपने नंगेपन की लज्जा को ढांप सको. मुझसे सुर्मा लेकर अपनी आंखों में लगाओ कि तुम्हें दिखाई देने लगे.
१९
अपने सभी प्रेम करनेवालों को मैं ताड़ना देता तथा अनुशासित करता हूं. इसलिये बहुत उत्साहित होकर पश्चाताप करो.
२०
सुनो! मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता रहा हूं. यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, मैं उसके घर में प्रवेश करूंगा तथा मैं उसके साथ और वह मेरे साथ भोजन करेगा.
२१
जो विजयी होगा, उसे मैं अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठने का अधिकार दूंगा—ठीक जैसे स्वयं मैंने विजय प्राप्‍त की तथा अपने पिता के साथ उनके सिंहासन पर आसीन हुआ.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 75 chars

Options