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प्रकाशन १७:७-१४

पशु और स्त्री का रहस्य

प्रकाशन १७:७-१४
किंतु स्वर्गदूत ने मुझसे कहा: “क्यों हो रहे हो हैरान? मैं तुम्हें इस स्त्री तथा इस हिंसक जानवर का रहस्य बताऊंगा, जिसके सात सिर और दस सींग हैं, जिस पर यह स्त्री बैठी हुई है.
वह हिंसक जानवर, जिसे तुमने देखा था, पहले जीवित था किंतु अब नहीं. अब वह अथाह गड्ढे से निकलकर आने पर है—किंतु स्वयं अपने विनाश के लिए. पृथ्वी के वे सभी वासी, जिनके नाम सृष्टि के प्रारंभ से जीवन की पुस्तक में लिखे नहीं हैं, जब यह देखेंगे कि यह हिंसक पशु पहले था, अब नहीं है किंतु दोबारा आएगा, आश्चर्यचकित हो जाएंगे.
“इसे समझने के लिए आवश्यक है सूक्ष्म ज्ञान: वे सात सिर सात पर्वत हैं, जिन पर वह स्त्री बैठी है. वे सात राजा भी हैं.
१०
इनमें से पांच का पतन हो चुका है, एक जीवित है और एक अब तक नहीं आया. जब वह आएगा, वह थोड़े समय के लिए ही आएगा.
११
वह हिंसक पशु, जो था और जो नहीं है स्वयं आठवां राजा है किंतु वह है इन सातों में से ही एक, जिसका विनाश तय है.
१२
“वे दस सींग, जो तुमने देखे हैं, दस राजा हैं, जिन्हें अब तक राज्य प्राप्‍त नहीं हुआ किंतु उन्हें एक घंटे के लिए उस हिंसक पशु के साथ राजसत्ता दी जाएगी.
१३
ये राजा अपना अधिकार व सत्ता उस पशु को सौंपने के लिए एक मत हैं;
१४
ये मेमने के विरुद्ध युद्ध छेड़ेंगे किंतु मेमना उन्हें हराएगा क्योंकि सर्वप्रधान प्रभु और सर्वप्रधान राजा वही है. मेमने के साथ उसके बुलाए हुए, चुने हुए तथा विश्वासपात्र होंगे.”
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