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प्रकाशन १७:१-६

बड़ी वेश्या का न्याय

प्रकाशन १७:१-६
तब कटोरे लिए हुए सात स्वर्गदूतों में से एक ने आकर मुझसे कहा, “यहां आओ, मैं तुम्हें उस कुख्यात व्यभिचारिणी के लिए तय किए गए दंड दिखाऊं. यह व्यभिचारिणी बहुत से पानी पर बैठी हुई है.
इसके साथ पृथ्वी के राजा वेश्यागामी में लीन थे तथा जिसके वेश्यागामी का दाखरस से पृथ्वी पर रहनेवाले मतवाले थे.”
वह स्वर्गदूत मुझे मेरी आत्मा में ध्यानमग्न कर एक बंजर भूमि में ले गया. वहां मैंने एक स्त्री को लाल रंग के एक हिंसक जानवर पर बैठे देखा, जो परमेश्वर की निंदा के शब्द से ढका सा था और इसके सात सिर तथा दस सींग थे.
वह स्त्री बैंगनी और लाल रंग के वस्त्र तथा सोने, रत्नों तथा मोतियों के आभूषण धारण की हुई थी. उसके हाथ में सोने का प्याला था, जो अश्लीलता तथा स्वयं उसकी वेश्यागामी की गंदगी से भरा हुआ था.
उसके माथे पर एक नाम, एक रहस्य लिखा था: भव्य महानगरी बाबेल पृथ्वी पर व्यभिचारणियों की माता और सारी अश्लीलताओं की जननी.
मैंने देखा कि वह स्त्री पवित्र लोगों तथा मसीह येशु के साक्ष्यों का लहू पीकर मतवाली थी. उसे देख मैं बहुत ही हैरान रह गया.
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