स्तोत्र १२२:१-५
१
आराधना के लिए यात्रियों का गीत. दावीद की रचना. जब यात्रियों ने मेरे सामने यह प्रस्ताव रखा, “चलो, याहवेह के आवास को चलें,” मैं अत्यंत उल्लसित हुआ.
२
येरूशलेम, हम तुम्हारे द्वार पर खड़े हुए हैं.
३
येरूशलेम उस नगर के समान निर्मित है, जो संगठित रूप में बसा हुआ है.
४
यही है वह स्थान, जहां विभिन्न कुल, याहवेह के कुल, याहवेह के नाम के प्रति आभार प्रदर्शित करने के लिए जाया करते हैं जैसा कि उन्हें आदेश दिया गया था.
५
यहीं न्याय-सिंहासन स्थापित हैं, दावीद के वंश के सिंहासन.
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