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स्तोत्र १२२:१-२

स्तोत्र १२२:१-२

आराधना के लिए यात्रियों का गीत. दावीद की रचना. जब यात्रियों ने मेरे सामने यह प्रस्ताव रखा, “चलो, याहवेह के आवास को चलें,” मैं अत्यंत उल्‍लसित हुआ.
येरूशलेम, हम तुम्हारे द्वार पर खड़े हुए हैं.
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