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स्तोत्र १२२:३-५

पवित्र नगर का उद्देश्य

स्तोत्र १२२:३-५
येरूशलेम उस नगर के समान निर्मित है, जो संगठित रूप में बसा हुआ है.
यही है वह स्थान, जहां विभिन्‍न कुल, याहवेह के कुल, याहवेह के नाम के प्रति आभार प्रदर्शित करने के लिए जाया करते हैं जैसा कि उन्हें आदेश दिया गया था.
यहीं न्याय-सिंहासन स्थापित हैं, दावीद के वंश के सिंहासन.
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