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1 कोरिंथ ६:१२-२०

यौन अनैतिकता देह को अशुद्ध करती है

1 कोरिंथ ६:१२-२०
१२
कदाचित कोई यह कहे, “मेरे लिए सब कुछ व्यवस्था के हिसाब से सही है.” ठीक है, किंतु मैं कहता हूं कि तुम्हारे लिए सब कुछ लाभदायक नहीं है. मैं भी कह सकता हूं कि मेरे लिए सब कुछ व्यवस्था के हिसाब से सही है किंतु मैं नहीं चाहूंगा कि मैं किसी भी वस्तु का दास बनूं.
१३
तब कदाचित कोई कहे, “भोजन पेट के लिए तथा पेट भोजन के लिए है.” ठीक है, किंतु मैं कहता हूं कि परमेश्वर दोनों ही को समाप्‍त कर देंगे. सच यह भी है कि शरीर वेश्यागामी के लिए नहीं परंतु प्रभु के लिए है तथा प्रभु शरीर के रक्षक हैं.
१४
परमेश्वर ने अपने सामर्थ्य से न केवल प्रभु को जीवित किया, उसी सामर्थ्य से वह हमें भी जीवित करेंगे.
१५
क्या तुम्हें मालूम नहीं कि तुम सबके शरीर मसीह के अंग हैं? तो क्या मैं मसीह के अंगों को वेश्या के अंग बना दूं? ऐसा बिलकुल न हो!
१६
क्या तुम्हें यह अहसास नहीं कि वह, जो वेश्या से जुड़ा होता है, उसके साथ एक तन हो जाता है? क्योंकि परमेश्वर ने कहा है, “वे दोनों एक तन होंगे.”
१७
वह, जो प्रभु से जुड़ा होता है, उनसे एक आत्मा हो जाता है.
१८
वेश्यागामी से दूर भागो! मनुष्य द्वारा किए गए अन्य पाप उसके शरीर को प्रभावित नहीं करते किंतु वेश्यावृत्ति करनेवाला अपने ही शरीर के विरुद्ध पाप करता है.
१९
क्या तुम्हें यह अहसास नहीं कि तुम्हारा शरीर पवित्र आत्मा का—जिनका तुम्हारे अंदर वास है तथा जो तुम्हें परमेश्वर से प्राप्‍त हुए हैं—मंदिर है? तुम पर तुम्हारा अधिकार नहीं
२०
क्योंकि तुम्हें दाम देकर मोल लिया गया है; इसलिये अपने शरीर के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो.

बाइबल पाठ: Biblica® Open Hindi Contemporary Version™, © 1978, 2009, 2016, 2019 Biblica, Inc. · CC BY-SA 4.0“Biblica” is a trademark registered in the United States Patent and Trademark Office by Biblica, Inc., used with permission.