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1 कोरिंथ १५:५१-५७

मृत्यु पर अन्तिम विजय

1 कोरिंथ १५:५१-५७
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सुनो! मैं तुम पर एक भेद प्रकट करता हूं: हम सभी सो नहीं जाएंगे परंतु हम सभी का रूप बदल
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जाएगा—क्षण-भर में, पलक झपकते ही, आखिरी तुरही के स्वर पर. ज्यों ही आखिरी तुरही का स्वर होगा, मरे हुए अविनाशी दशा में जीवित किए जाएंगे और हमारा रूप बदल जाएगा.
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यह ज़रूरी है कि नाशमान अविनाशी को धारण करे तथा मरणहार अमरता को.
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किंतु जब यह नाशमान अविनाशी को तथा मरणहार अमरता को धारण कर लेगा तब पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हो जाएगा: “मृत्यु विजय का निवाला बन गई.”
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मृत्यु! कहां है तेरी विजय? मृत्यु! कहां है तेरा ड़ंक?
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मृत्यु का ड़ंक है पाप और पाप का बल है व्यवस्था.
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किंतु हम धन्यवाद करते हैं परमेश्वर का, जो हमें हमारे प्रभु येशु मसीह द्वारा विजय प्रदान करते हैं.
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