समापन का उपदेश
आसपास के संदर्भ के साथ पद ५८ दिखाया जा रहा है।
५५
मृत्यु! कहां है तेरी विजय? मृत्यु! कहां है तेरा ड़ंक?
५६
मृत्यु का ड़ंक है पाप और पाप का बल है व्यवस्था.
५७
किंतु हम धन्यवाद करते हैं परमेश्वर का, जो हमें हमारे प्रभु येशु मसीह द्वारा विजय प्रदान करते हैं.
५८
इसलिये मेरे प्रिय भाई बहनो, इस सच्चाई के प्रकाश में कि प्रभु में तुम्हारा परिश्रम व्यर्थ नहीं है, तुम प्रभु के काम में उन्नत होते हुए हमेशा दृढ़ तथा स्थिर रहो.
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