स्तोत्र ५४
संकट में दावीद की प्रार्थना १–३
१
संगीत निर्देशक के लिये. तार वाद्यों की संगत के साथ. दावीद की मसकील गीत रचना. यह उस स्थिति के संदर्भ में है, जब ज़िफियों ने जाकर शाऊल को सूचना दी थी: “दावीद हमारे यहां छिपे हैं.” परमेश्वर, अपने नाम के द्वारा मेरा उद्धार कीजिए; अपनी सामर्थ्य के द्वारा मुझे निर्दोष प्रमाणित कीजिए.
२
परमेश्वर, मेरी प्रार्थना सुनिए; मेरे मुख के वचनों पर ध्यान दीजिए.
३
ऐसे अपरिचित पुरुषों ने मुझ पर आक्रमण कर दिया है; कुकर्मी पुरुष अब मेरे प्राण के प्यासे हो गए हैं, जिनके हृदय में आपके प्रति कोई श्रद्धा नहीं है.
परमेश्वर की सहायता का आश्वासन ४–५
४
कोई संदेह नहीं कि परमेश्वर मेरी सहायता के लिए तत्पर हैं; प्रभु ही हैं, जो मुझमें बल देते हैं.
५
ऐसा हो कि बुराई मेरे निंदकों पर ही जा पड़े; परमेश्वर अपनी विश्वासयोग्यता के कारण उनका विनाश कर दीजिए.
स्तुति और धन्यवाद की मन्नत ६–७
६
मैं आपको स्वेच्छा बलि अर्पित करूंगा; याहवेह, मैं आपकी महान महिमा की सराहना करूंगा, क्योंकि यह शोभनीय है.
७
आपने समस्त संकटों से मेरा छुटकारा किया है, मैंने स्वयं अपनी आंखों से, अपने शत्रुओं की पराजय देखी है.
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Study note