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रोमियों १५:२२-२९

पौलुस की यात्रा की योजना और यरूशलेम के लिए चन्दा

रोमियों १५:२२-२९
२२
यही वह कारण है कि तुमसे भेंट करने के लिए मेरे आने में बाधा पड़ती रही.
२३
अब इन देशों में मेरे सामने कोई स्थान बाकी नहीं रहा और अनेक वर्षों से मेरी यह इच्छा भी रही है कि तुमसे भेंट करूं.
२४
मेरे लिए यह संभव हो सकेगा जब मैं स्पेन यात्रा को जाऊंगा. मुझे आशा है कि जाते हुए तुमसे भेंट हो तथा थोड़े समय के लिए तुम्हारी संगति का आनंद लूं और तुम्हारी सहायता भी प्राप्‍त कर सकूं
२५
किंतु इस समय तो मैं येरूशलेम के पवित्र लोगों की सहायता के लिए येरूशलेम की ओर जा रहा हूं.
२६
मकेदोनिया तथा आखाया प्रदेश की कलीसियाएं येरूशलेम के निर्धन पवित्र लोगों की सहायता के लिए खुशी से सामने आई.
२७
सच मानो, उन्होंने यह खुशी से किया है. वे येरूशलेम वासियों के कर्ज़दार हैं क्योंकि जब गैर-यहूदियों ने उनसे आत्मिक धन प्राप्‍त किया है तो यह उचित ही है कि अब वे भौतिक वस्तुओं द्वारा भी उनकी सहायता करें.
२८
इसलिये अपने कर्तव्य को पूरा कर जब मैं निश्चित हो जाऊंगा कि उन्हें यह राशि प्राप्‍त हो गई है, मैं स्पेन की ओर जाऊंगा तथा मार्ग में तुमसे भेंट करूंगा.
२९
यह तो मुझे मालूम है कि जब मैं तुमसे भेंट करूंगा, मेरे साथ मसीह येशु की आशीष पूरी तरह होंगी.
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