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स्तोत्र ४५:१-९

राजा की महिमा और सामर्थ्य की स्तुति

स्तोत्र ४५:१-९
१
संगीत निर्देशक के लिये. “कुमुदिनी” धुन पर आधारित. कोराह के पुत्रों की रचना. एक मसकील. एक विवाह गीत. राजा के सम्मान में कविता पाठ करते हुए मेरे हृदय में मधुर भाव उमड़ रहा हैं; मेरी जीभ कुशल लेखक की लेखनी बन गई है.
२
आप ही पुरुषों में सर्वश्रेष्ठ हैं, आपके होंठों में अनुग्रह भरा होता है, क्योंकि स्वयं परमेश्वर द्वारा आपको सदैव के लिए आशीषित किया गया है.
३
परमवीर योद्धा, तलवार से सुसज्जित हो जाइए; ऐश्वर्य और तेज धारण कर लीजिए.
४
सत्य, विनम्रता तथा धार्मिकता की रक्षा करते हुए, आपके समृद्ध यश में, ऐश्वर्य के साथ अपने अश्व पर सवार हो जाइए! आपका दायां हाथ अद्भुत कार्य कर दिखाए!
५
आपके तीक्ष्ण बाण राजा के शत्रुओं के हृदय बेध दें; राष्ट्र आपसे नाश हो आपके चरणों में गिर पड़ें.
६
परमेश्वर, आपका सिंहासन अमर है; आपके राज्य का राजदंड वही होगा, जो सच्चाई का राजदंड है.
७
धार्मिकता आपको प्रिय है तथा दुष्टता घृणास्पद; यही कारण है कि परमेश्वर, आपके परमेश्वर ने हर्ष के तेल से आपको अभिषिक्त करके आपके समस्त साथियों से ऊंचे स्थान पर बसा दिया है.
८
आपके सभी वस्त्र गन्धरस, अगरू तथा तेजपात से सुगंधित किए गए हैं; हाथी-दांत से जड़ित राजमहल से मधुर तन्तु वाद्यों का संगीत आपको मगन करता रहता है.
९
आपके राज्य में आदरणीय स्त्रियों के पद पर राजकुमारियां हैं; आपके दायें पक्ष में ओफीर राज्य के कुन्दन से सजी राज-वधू विराजमान हैं.

बाइबल पाठ: Biblica® Open Hindi Contemporary Version™, © 1978, 2009, 2016, 2019 Biblica, Inc. · CC BY-SA 4.0“Biblica” is a trademark registered in the United States Patent and Trademark Office by Biblica, Inc., used with permission.