स्तोत्र १३६:१-१३
१
याहवेह का धन्यवाद करो, क्योंकि वे भले हैं, सनातन है उनकी करुणा.
२
परम परमेश्वर के प्रति आभार अभिव्यक्त करो. सनातन है उनकी करुणा.
३
उनके प्रति, जो प्रधानों के प्रधान हैं, आभार अभिव्यक्त करो: सनातन है उनकी करुणा.
४
उनके प्रति, जिनके अतिरिक्त अन्य कोई अद्भुत कार्य कर ही नहीं सकता, सनातन है उनकी करुणा.
५
जिन्होंने अपनी सुबुद्धि से स्वर्ग का निर्माण किया, सनातन है उनकी करुणा.
६
जिन्होंने जल के ऊपर पृथ्वी का विस्तार कर दिया, सनातन है उनकी करुणा.
७
जिन्होंने प्रखर प्रकाश पुंजों की रचना की, सनातन है उनकी करुणा.
८
दिन के प्रभुत्व के लिए सूर्य का, सनातन है उनकी करुणा.
९
रात्रि के लिए चंद्रमा और तारों का; सनातन है उनकी करुणा.
१०
उन्हीं के प्रति, जिन्होंने मिस्र देश के पहलौठों की हत्या की, सनातन है उनकी करुणा.
११
और उनके मध्य से इस्राएल राष्ट्र को बाहर निकाल लिया, सनातन है उनकी करुणा.
१२
सशक्त भुजा और ऊंची उठी हुई बांह के द्वारा; सनातन है उनकी करुणा.
१३
उन्हीं के प्रति, जिन्होंने लाल सागर को विभक्त कर दिया था सनातन है उनकी करुणा.
बाइबल पाठ: Biblica® Open Hindi Contemporary Version™, © 1978, 2009, 2016, 2019 Biblica, Inc. · CC BY-SA 4.0“Biblica” is a trademark registered in the United States Patent and Trademark Office by Biblica, Inc., used with permission.
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