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स्तोत्र १३६:४-९

स्तोत्र १३६:४-९

उनके प्रति, जिनके अतिरिक्त अन्य कोई अद्भुत कार्य कर ही नहीं सकता, सनातन है उनकी करुणा.
जिन्होंने अपनी सुबुद्धि से स्वर्ग का निर्माण किया, सनातन है उनकी करुणा.
जिन्होंने जल के ऊपर पृथ्वी का विस्तार कर दिया, सनातन है उनकी करुणा.
जिन्होंने प्रखर प्रकाश पुंजों की रचना की, सनातन है उनकी करुणा.
दिन के प्रभुत्व के लिए सूर्य का, सनातन है उनकी करुणा.
रात्रि के लिए चंद्रमा और तारों का; सनातन है उनकी करुणा.
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