Skip to content
स्तोत्र १२२:१-४

स्तोत्र १२२:१-४

आराधना के लिए यात्रियों का गीत. दावीद की रचना. जब यात्रियों ने मेरे सामने यह प्रस्ताव रखा, “चलो, याहवेह के आवास को चलें,” मैं अत्यंत उल्‍लसित हुआ.
येरूशलेम, हम तुम्हारे द्वार पर खड़े हुए हैं.
येरूशलेम उस नगर के समान निर्मित है, जो संगठित रूप में बसा हुआ है.
यही है वह स्थान, जहां विभिन्‍न कुल, याहवेह के कुल, याहवेह के नाम के प्रति आभार प्रदर्शित करने के लिए जाया करते हैं जैसा कि उन्हें आदेश दिया गया था.
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options