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स्तोत्र १००:४-५

स्तुति के साथ परमेश्वर की उपस्थिति में प्रवेश

स्तोत्र १००:४-५
धन्यवाद के भाव में उनके द्वारों में और स्तवन भाव में उनके आंगनों में प्रवेश करो; उनकी महिमा को धन्य कहो.
याहवेह भले हैं; उनकी करुणा सदा की है; उनकी सच्चाई का प्रसरण समस्त पीढ़ियों में होता जाता है.
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