मीकाह १:२-७
२
हे लोगों, तुम सब सुनो, पृथ्वी और इसके सभी निवासियों, इस पर ध्यान दो, कि प्रभु अपने पवित्र मंदिर से, परम याहवेह तुम्हारे विरुद्ध गवाही दें.
३
देखो! याहवेह अपने निवास से निकलकर आ रहे हैं; वे नीचे उतरकर पृथ्वी के ऊंचे स्थानों को रौंदते हैं.
४
उनके पैरों के नीचे पर्वत पिघल जाते हैं और जैसे आग के आगे मोम, और जैसे ढलान से गिरता पानी, वैसे ही घाटियां तड़क कर फट जाती हैं.
५
यह सब याकोब के अपराध, और इस्राएल के लोगों के पाप का परिणाम है. याकोब का अपराध क्या है? क्या शमरिया नहीं? यहूदिया का ऊंचा स्थान (देवताओं के पूजा-स्थल) क्या है? क्या येरूशलेम नहीं?
६
“इसलिये मैं शमरिया को मैदान में खंडहर के ढेर सा कर दूंगा, एक ऐसी जगह जहां अंगूर की बारी लगाई जाती है. मैं उसके पत्थरों को नीचे घाटी में लुढ़का दूंगा और उसकी नीवें खुली कर दूंगा.
७
उसकी सब मूर्तियां टुकड़े-टुकड़े कर दी जाएंगी; उसके मंदिर के सब भेटों को आग में जला दिया जाएगा; मैं उसकी सब मूर्तियों को नष्ट कर दूंगा. क्योंकि उसने अपनी भेटों को वेश्यावृत्ति करके प्राप्त किया है, और वेश्यावृत्ति के मजदूरी के रूप में वे फिर उपयोग में लाई जाएंगी.”
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