१८
जैसा उनके लिए उचित है, जो प्रभु में हैं, पत्नी अपने पति के अधीन रहे.
१९
पति अपनी पत्नी से प्रेम करे—उसके प्रति कठोर न हो.
२०
बालक हमेशा अपने माता-पिता की आज्ञापालन करें क्योंकि प्रभु के लिए यही प्रसन्नता है.
२१
पिता अपनी संतान को असंतुष्ट न करे कि उनका साहस टूट जाए.