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स्तोत्र ६९:१०-१२

स्तोत्र ६९:१०-१२

१०
जब मैंने उपवास करते हुए विलाप किया, तो मैं उनके लिए घृणा का पात्र बन गया;
११
जब मैंने शोक-वस्त्र धारण किए, तो लोग मेरी निंदा करने लगे.
१२
नगर द्वार पर बैठे हुए पुरुष मुझ पर ताना मारते हैं, मैं पियक्कड़ पुरुषों के गीतों का विषय बन चुका हूं.
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