स्तोत्र ६७:२-५
२
पृथ्वी पर आपकी इच्छा प्रकाशित होती रहे, तथा समस्त राष्ट्रों को आपके उद्धार का परिचय प्राप्त हो.
३
हे परमेश्वर, मनुष्य आपका स्तवन करते रहें; सभी मनुष्यों द्वारा आपका स्तवन होता रहे.
४
हर एक राष्ट्र उल्लसित होकर हर्षोल्लास में गाने लगे, क्योंकि आपका न्याय सभी के लिए खरा है और आप पृथ्वी के हर एक राष्ट्र की अगुवाई करते हैं.
५
हे परमेश्वर, मनुष्य आपका स्तवन करते रहें; सभी मनुष्यों द्वारा आपका स्तवन होता रहे.
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