Skip to content
स्तोत्र ६४:३-४

स्तोत्र ६४:३-४

३
उन्होंने तलवार के समान अपनी जीभ तेज कर रखी है और अपने शब्दों को वे लक्ष्य पर ऐसे छोड़ते हैं, जैसे घातक बाणों को.
४
वे निर्दोष पुरुष की घात में बैठकर बाण चलाते हैं; वे निडर होकर अचानक रूप से प्रहार करते हैं.
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 75 chars

Options