मुख्य सामग्री पर जाएँ
स्तोत्र ६:४-५

स्तुति के लिए जीवन का आवश्यक होना

स्तोत्र ६:४-५
याहवेह, आकर मुझे बचा लीजिए; अपने करुणा-प्रेम के निमित्त मुझे बचा लीजिए.
क्योंकि मृत अवस्था में आपका स्मरण करना संभव नहीं. अधोलोक में कौन आपका स्तवन कर सकता है?
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Reading Width 45 chars

Options