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स्तोत्र ४६:४-६

स्तोत्र ४६:४-६

परमेश्वर के नगर में एक नदी है, जिसकी जलधारा में इस नगर का उल्लास है, यह नगर वह पवित्र स्थान है, जहां सर्वोच्च परमेश्वर निवास करते हैं.
परमेश्वर इस नगर में निवास करते हैं, इस नगर की क्षति न होगी; हर एक अरुणोदय में उसके लिए परमेश्वर की सहायता मिलती रहेगी.
राष्ट्रों में खलबली मची हुई है, राज्य के लोग डगमगाने लगे; परमेश्वर के एक आह्वान पर, पृथ्वी पिघल जाती है.
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