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सूक्ति संग्रह २३:२७-२८

सूक्ति संग्रह २३:२७-२८

२७
वेश्या एक गहरा गड्ढा होती है, पराई स्त्री एक संकरा कुंआ है.
२८
वह डाकू के समान ताक लगाए बैठी रहती है इसमें वह मनुष्यों में विश्‍वासघातियों की संख्या में वृद्धि में योग देती जाती है.
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