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सूक्ति संग्रह २३:२६-२८

यौन अनैतिकता का खतरा

सूक्ति संग्रह २३:२६-२८
२६
मेरे पुत्र, अपना हृदय मुझे दे दो; तुम्हारे नेत्र मेरी जीवनशैली का ध्यान करते रहें,
२७
वेश्या एक गहरा गड्ढा होती है, पराई स्त्री एक संकरा कुंआ है.
२८
वह डाकू के समान ताक लगाए बैठी रहती है इसमें वह मनुष्यों में विश्‍वासघातियों की संख्या में वृद्धि में योग देती जाती है.
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