Skip to content
मत्तियाह ८:२३-२७

यीशु आँधी को शान्त करता है

मत्तियाह ८:२३-२७
२३
जब उन्होंने नाव में प्रवेश किया उनके शिष्य भी उनके साथ हो लिए.
२४
अचानक झील में ऐसा प्रचंड आंधी उठी कि लहरों ने नाव को ढांक लिया, किंतु येशु इस समय सो रहे थे.
२५
इस पर शिष्यों ने येशु के पास जाकर उन्हें जगाते हुए कहा, “प्रभु, हमारी रक्षा कीजिए, हम नाश हुए जा रहे हैं!”
२६
येशु ने उनसे कहा, “क्यों डर रहे हो, अल्पविश्वासियो!” वह उठे और उन्होंने आंधी और झील को डांटा, और उसी क्षण ही पूरी शांति छा गई.
२७
शिष्य हैरान रह गए, और विचार करने लगे, “ये किस प्रकार के व्यक्ति हैं कि आंधी और झील तक इनकी आज्ञा का पालन करते हैं!”
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options