मुख्य सामग्री पर जाएँ
विलापगीत ३:४०-४७

पश्चात्ताप और सामूहिक अंगीकार का आह्वान

विलापगीत ३:४०-४७
४०
आइए हम अपनी नीतियों का परीक्षण करें तथा अपने याहवेह की ओर लौट चलें:
४१
आइए हम अपने हृदय एवं अपनी बांहें परमेश्वर की ओर उन्मुख करें तथा अपने हाथ स्वर्गिक परमेश्वर की ओर उठाएं:
४२
“हमने अपराध किए हैं, हम विद्रोही हैं, आपने हमें क्षमा प्रदान नहीं की है.
४३
“आपने स्वयं को कोप में भरकर हमारा पीछा किया; निर्दयतापूर्वक हत्यायें की हैं.
४४
आपने स्वयं को एक मेघ में लपेट रखा है, कि कोई भी प्रार्थना इससे होकर आप तक न पहुंच सके.
४५
आपने हमें राष्ट्रों के मध्य कीट तथा कूड़ा बना छोड़ा है.
४६
“हमारे सभी शत्रु बेझिझक हमारे विरुद्ध निंदा के शब्द उच्चार रहे हैं.
४७
आतंक, जोखिम, विनाश तथा विध्वंस हम पर आ पड़े हैं.”
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Reading Width 45 chars

Options