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येरेमियाह ५०:४१-४६

येरेमियाह ५०:४१-४६

४१
“अब देखो! उत्तर की ओर से एक राष्ट्र आक्रमण कर रहा है; यह राष्ट्र सशक्त है तथा इसके राजा अनेक, वे पृथ्वी के दूर क्षेत्रों से प्रेरित किए जा रहे हैं.
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वे अपना धनुष एवं बर्छी उठा रहे हैं; वे निर्मम एवं क्रूर हैं. उनका स्वर सागर की लहरों के गर्जन सदृश है, वे घोड़ों पर सवार होकर आगे बढ़ते आ रहे हैं; वे युद्ध के लिए सुसज्जित योद्धा सदृश हैं. बाबेल की पुत्री, वे तुम पर आक्रमण करेंगे.
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बाबेल के राजा को इसकी सूचना प्राप्‍त हो चुकी है, उसके हाथ ढीले पड़ चुके हैं. पीड़ा ने उसे अपने अधीन कर रखा है, वैसी ही पीड़ा जैसी प्रसूता की होती है.
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यह देखना, यरदन की झाड़ियों में से कोई सिंह सदृश निकलकर मजबूत चरवाहों पर आक्रमण कर देगा, क्योंकि मैं एक ही क्षण में उसे वहां पलायन के लिए प्रेरित कर दूंगा. तथा इस क्षेत्र पर मैं उसे नियुक्त कर दूंगा, जो इसके लिए असमर्थ किया जा चुका है. कौन है मेरे तुल्य तथा किसमें क्षमता है मुझे न्यायालय में बुलाने की? इसके सिवा कौन है वह चरवाहा, जो मेरे समक्ष ठहर सकेगा?”
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इसलिये अब याहवेह की उस योजना को समझ लो, जो उन्होंने बाबेल के प्रति योजित की है, तथा उन लक्ष्यों को भी, जो उन्होंने तेमानवासियों के संकट के लिए निर्धारित किए हैं: इसमें कोई संदेह नहीं कि वे उन्हें खींचकर ले जाएंगे-भले ही वे भेड़-बकरियां के बच्चों की नाई हों; उनके कारण याहवेह उनकी चराइयों को निश्चयतः निर्जन बनाकर छोड़ेंगे.
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इस घोषनाद के कारण: बाबेल बंदी बना लिया गया है; पृथ्वी कांप उठी है, सभी राष्ट्रों में निराशा की चिल्लाहट प्रतिध्वनित हो गई है.
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