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यशायाह ३२:१५-२०

यशायाह ३२:१५-२०

१५
जब तक हम पर ऊपर से आत्मा न उंडेला जाए, और मरुभूमि फलदायक खेत न बन जाए, और फलदायक खेत वन न बन जाए.
१६
तब तक उस बंजर भूमि में याहवेह का न्याय रहेगा, और फलदायक खेत में धर्म रहेगा.
१७
धार्मिकता का फल है शांति, उसका परिणाम चैन; और हमेशा के लिए साहस!
१८
तब मेरे लोग शांति से, और सुरक्षित एवं स्थिर रहेंगे.
१९
और वन विनाश होगा और उस नगर का घमंड चूर-चूर किया जाएगा,
२०
क्या ही धन्य हो तुम, जो जल के स्रोतों के पास बीज बोते हो, और गधे और बैल को आज़ादी से चराते हो.
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