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यशायाह ३२:१५-१८

यशायाह ३२:१५-१८

१५
जब तक हम पर ऊपर से आत्मा न उंडेला जाए, और मरुभूमि फलदायक खेत न बन जाए, और फलदायक खेत वन न बन जाए.
१६
तब तक उस बंजर भूमि में याहवेह का न्याय रहेगा, और फलदायक खेत में धर्म रहेगा.
१७
धार्मिकता का फल है शांति, उसका परिणाम चैन; और हमेशा के लिए साहस!
१८
तब मेरे लोग शांति से, और सुरक्षित एवं स्थिर रहेंगे.
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