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यशायाह १०:५-८

यशायाह १०:५-८

५
“अश्शूर पर हाय, जो मेरे क्रोध का सोंटा तथा लाठी है!
६
मैं उसको एक श्रद्धाहीन जाति के विरुद्ध भेजूंगा, और उन लोगों के विरुद्ध जिनसे मैं क्रोधित हूं, उसे आज्ञा दे रहा हूं कि वह इसे उजाड़ दे, लूट ले और गलियों के कीचड़-समान रौंद डाले.
७
किंतु फिर भी उसकी इच्छा यह नहीं और न ही उसके हृदय में ऐसी कोई युक्ति है; परंतु उसका यह उद्देश्य है, कि वह अनेक देशों को नष्ट करे और मिटा डाले.
८
क्योंकि वह यह कहता है, ‘क्या मेरे सब हाकिम राजा नहीं?
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