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होशेआ १०:१२-१५

मन फिराने और धार्मिकता का आह्वान

होशेआ १०:१२-१५
१२
अपने लिए धर्मीपन का बीज बोओ, निश्छल प्रेम की फसल काटो, और न जूते हुए भूमि की मिट्टी को तोड़ो; क्योंकि यह समय है कि याहवेह की खोज करो, जब तक कि वह आकर तुम पर धर्मीपन की वर्षा न करें.
१३
पर तुमने दुष्टता का रोपण किया है, और बुराई का फसल काटा है, तुमने छल-प्रपंच का फल खाया है. क्योंकि तुम अपने स्वयं के बल और अपने योद्धाओं की बड़ी संख्या पर निर्भर रहे हो,
१४
तुम्हारे लोगों के विरुद्ध युद्ध की ललकार होगी, ताकि तुम्हारे सब गढ़ों को नष्ट कर दिया जाए— जैसा कि युद्ध के समय में शलमन ने बेथ-आरबेल को नष्ट किया था, जब माताओं को उनके बच्चों सहित भूमि पर पटक कर मार डाला गया था.
१५
हे बेथेल तुम्हारे साथ भी ऐसा ही होगा, क्योंकि तुम्हारी दुष्टता बहुत बड़ी है. जब उस दिन बड़ी सुबह इस्राएल के राजा को पूरी तरह नाश कर दिया जाएगा.
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