Skip to content
व्यवस्था ३२:३४-३५

व्यवस्था ३२:३४-३५

३४
“क्या यह सब मेरे भंडार में संग्रहीत नहीं है; मेरे कोष में मोहर के द्वारा सुरक्षित?
३५
प्रतिशोध मेरा दायित्व है; प्रतिदण्ड मैं दूंगा. वह अवसर आएगा, जब उनका पैर तो फिसलेगा ही; क्योंकि उनका विपदा दिवस आसन्‍न है, और द्रुत गति है उन पर आ रही नियति की.”
Settings

Reading style

Typeface

Font size 19px

Reading width 75 chars

Options