Skip to content
1 कोरिंथ १५:५४-५५

1 कोरिंथ १५:५४-५५

५४
किंतु जब यह नाशमान अविनाशी को तथा मरणहार अमरता को धारण कर लेगा तब पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हो जाएगा: “मृत्यु विजय का निवाला बन गई.”
५५
मृत्यु! कहां है तेरी विजय? मृत्यु! कहां है तेरा ड़ंक?
Settings

Reading Style

Typeface

Font Size 19px

Options