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1 कोरिंथ १४:१-४

1 कोरिंथ १४:१-४

१
इसलिये प्रेम का स्वभाव रखते हुए आत्मिक वरदानों की बड़ी इच्छा करते रहो—विशेष रूप से भविष्यवाणी करने के वर की.
२
वह, जो अन्य भाषा में विचार प्रकट करता है, मनुष्यों से नहीं, परमेश्वर से बातें करता है. सच्चाई तो यह है कि कोई भी सुननेवाला उसकी भाषा नहीं समझता—वह पवित्र आत्मा की अगुवाई के द्वारा गूढ़ सच्चाई प्रकट करता है.
३
किंतु वह, जो भविष्यवाणी करता है, आत्मिक उन्‍नति, प्रोत्साहन तथा धीरज के लिए मनुष्यों को संबोधित करता है;
४
वह, जो अन्य भाषा में संदेश सुनाता है, मात्र स्वयं को उन्‍नत करता है किंतु वह, जो भविष्यवाणी करता है, कलीसिया को उन्‍नत करता है.
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