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God

11,427 वचन · 2 परिवार के सदस्य

God का उल्लेख करने वाले वचन

पुस्तक के अनुसार छाँटें
  1. याकोब के घराने में से एक महान अधिकारी हो जाएगा, वही इस नगर के बचे हुए भाग को नाश कर देगा.”

  2. इसके बाद बिलआम ने अपने वचन में यह कहा: “परमेश्वर द्वारा ठहराए गए के अलावा जीवित कौन रह सकता है?

  3. इस प्रकार इस्राएलियों ने पेओर के बाल के साथ स्वयं को जोड़ लिया था. इससे याहवेह इस्राएल पर क्रोधित हो गए.

  4. याहवेह ने मोशेह को आज्ञा दी, “दिन के प्रकाश में याहवेह के सामने सारी प्रजा के प्रधानों को फांसी दे दो, ताकि इस्राएल पर से याहवेह का भड़का हुआ क्रोध शांत हो सके.”

  5. याहवेह ने मोशेह पर यह सत्य प्रकट किया,

  6. “पुरोहित अहरोन के पुत्र एलिएज़र के पुत्र फिनिहास ने इस्राएल के घराने पर भड़के मेरे क्रोध को शांत कर दिया है. उन लोगों के बीच वही था जिसमें वही जलन थी, जो मुझमें थी. इसलिए मैंने अपनी जलन में इस्राएल के घराने को नाश नहीं कर डाला.

  7. तुम उसे सूचित करो: यह समझ लो कि मैं उसके साथ अपनी शांति की वाचा स्थापित कर रहा हूं.

  8. इसका संबंध उससे तथा उसके वंशजों से है, यह सदा के लिए पुरोहित पद की वाचा है, क्योंकि उसमें उसके परमेश्वर के लिए जलन थी. उसने इस्राएल के घराने के लिए प्रायश्चित पूरा कर दिया है.”

  9. इसके बाद याहवेह ने मोशेह को आज्ञा दी,

  10. इस महामारी के बाद याहवेह ने मोशेह तथा पुरोहित अहरोन के पुत्र एलिएज़र को आज्ञा दी,

  11. “बीस वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की गिनती की जाए, जैसा कि याहवेह द्वारा मोशेह को आदेश दिया गया है.” इस अवसर पर मिस्र देश से निकाले गए इस्राएल वंशज ये थे:

  12. एलियाब के तीन पुत्र थे—नमूएल, दाथान और अबीराम. याद रखो कि दाथान और अबीराम वे दो नेता थे, जो मोशेह और अहरोन के विरोधी हो गए थे. वे कोराह के अनुयायी थे और कोराह याहवेह का विरोधी हो गया था.

  13. याहवेह ने मोशेह से कहा,

  14. किंतु नादाब और अबीहू मर गए; क्योंकि उन्होंने याहवेह को उस आग से भेंट चढ़ाई जो उनके लिए स्वीकृत नहीं थी.)

  15. यह इसलिये हुआ कि याहवेह ने इस्राएल के लोगों से यह कहा था कि वे सभी मरुभूमि में मरेंगे. जो केवल दो जीवित बचे थे; येफुन्‍नेह का पुत्र कालेब और नून का पुत्र यहोशू!

  16. “हमारे पिता की मृत्यु तो बंजर भूमि में ही हो चुकी थी. वह उनमें शामिल नहीं थे, जो कोराह के साथ मिलकर याहवेह के विरुद्ध हो गए थे, उनकी मृत्यु उन्हीं के पाप में हो गई. उनके कोई पुत्र न था.

  17. फिर मोशेह ने यह विषय याहवेह के सामने रख दिया,

  18. तब याहवेह ने मोशेह को यह उत्तर दिया,

  19. यदि उसके पिता के कोई भाई भी न हो, तब तुम उसकी मीरास उसके परिवार में उसके ही निकटतम संबंधी को प्रदान कर दोगे, वह मीरास उसकी हो जाएगी. यह इस्राएल के घराने के लिए न्याय की विधि होगी, ठीक जैसा आदेश याहवेह द्वारा मोशेह को दिया गया था.’ ”

  20. इसके बाद याहवेह ने मोशेह को आज्ञा दी, “तुम इस अबारिम पर्वत पर जाओ और उस देश पर दृष्टि डाल लो, जो मैंने इस्राएल के घराने को दे दिया है.

  21. इसलिये, कि तुमने ज़िन के निर्जन प्रदेश में उस सोते के पास सारी सभा के सामने उनके द्वारा पैदा की गई विद्रोह की स्थिति में मेरी पवित्रता को प्रतिष्ठित करने के मेरे आदेश के विपरीत तुमने काम किया था.” (कादेश के ज़िन के निर्जन प्रदेश में यही था वह मेरिबाह का सोता.)

  22. फिर मोशेह ने याहवेह से विनती की,

  23. “सभी मनुष्यों की आत्माओं के परमेश्वर, याहवेह, इस सभा के लिए एक अगुए को नियुक्त कर दें.

  24. वही उनके हक में सही रहेगा. वही उनका अगुआ होकर इस देश में प्रवेश करवाएगा, जिससे याहवेह की प्रजा की स्थिति वैसी न हो जाए, जैसी बिना चरवाहे की भेड़-बकरियों की हो जाती है.”

  25. मोशेह के लिए याहवेह का उत्तर यह था, “नून के पुत्र यहोशू पर अपना हाथ रख दो-वह एक ऐसा व्यक्ति है, जिसमें पवित्र आत्मा का वास है.