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सर्वश्रेष्ठ गीत ८:१-४

अबाध स्नेह की अभिलाषा

सर्वश्रेष्ठ गीत ८:१-४
कैसा होता यदि तुम मेरे लिए मेरे भाई के समान होते, मेरी माता की छाती का दूध पीते हुए! और तब, तुम मुझे बाहर कहीं दिख जाते, तो मैं तुम्हें चूम लेती; इससे मुझे कोई भी तुच्छ नज़रों से न देखता.
मैं तुम्हें अपने साथ यहां ले आती, अपनी माता के घर में, जिसने मुझे शिक्षा दी है. मैं तुम्हें अपने अनारों के रस से बनी हुई उत्तम दाखमधु परोसती.
उसका बायां हाथ मेरे सिर के नीचे हो, तथा दाएं हाथ से वह मेरा आलिंगन करे.
येरूशलेम की कन्याओ, मुझको वचन दो, जब तक सही समय न आए, मेरे प्रेम को न जगाना.
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