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सर्वश्रेष्ठ गीत १:१५-१७

परस्पर प्रशंसा और प्रेम से बना घर

सर्वश्रेष्ठ गीत १:१५-१७
१५
मेरी प्रियतमा, कितनी सुंदर हो तुम! ओह, तुम वास्तव में कितनी सुंदर हो! तुम्हारी आंखें कबूतरी के समान हैं.
१६
कितने सुंदर लगते हो, तुम, मेरे प्रियतम! तथा आनन्द-दायक भी! वास्तव में कितना भव्य है हमारा बिछौना.
१७
हमारे घरों की धरनें देवदार की हैं; तथा छतें सनोवर की.

बाइबल पाठ: Biblica® Open Hindi Contemporary Version™, © 1978, 2009, 2016, 2019 Biblica, Inc. · CC BY-SA 4.0“Biblica” is a trademark registered in the United States Patent and Trademark Office by Biblica, Inc., used with permission.