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सर्वश्रेष्ठ गीत १:१२-१४

परस्पर आनन्द और स्नेह

सर्वश्रेष्ठ गीत १:१२-१४
१२
जब महाराज बैठे हुए थे, मेरा इत्र अपनी खुशबू फैला रहा था.
१३
मेरा प्रियतम मेरे लिए उस गन्धरस की थैली है, जो सारी रात मेरे स्तनों के बीच रहती है.
१४
मेरा प्रियतम मेरे लिए मेंहदी के फूलों के गुच्छे के समान है, जो एन-गेदी के अंगूरों के बगीचों में पाए जाते हैं.
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