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रोमियों १२:१७-१८

रोमियों १२:१७-१८

१७
किसी के प्रति भी दुष्टता का बदला दुष्टता न हो; तुम्हारा स्वभाव सब की दृष्टि में सुहावना हो;
१८
यदि संभव हो तो यथाशक्ति सभी के साथ मेल बनाए रखो.
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