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स्तोत्र ८९:५२

स्तुतिगान

स्तोत्र ८९:५२
आसपास के संदर्भ के साथ पद ५२ दिखाया जा रहा है।
४९
प्रभु, अब आपका वह करुणा-प्रेम कहां गया, जिसकी शपथ आपने अपनी सच्चाई में दावीद से ली थी?
५०
प्रभु, स्मरण कीजिए, कितना अपमान हुआ है आपके सेवक का, कैसे मैं समस्त राष्ट्रों द्वारा किए गए अपमान अपने हृदय में लिए हुए जी रहा हूं.
५१
याहवेह, ये सभी अपमान, जो मेरे शत्रु मुझ पर करते रहे, इनका प्रहार आपके अभिषिक्त के हर एक कदम पर किया गया.
५२
याहवेह का स्तवन सदा-सर्वदा होता रहे!
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