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स्तोत्र ८०:९-११

स्तोत्र ८०:९-११

आपने इसके लिए भूमि तैयार की, इस लता ने जड़ पकड़ी और इसने समस्त भूमि आच्छादित कर दी.
१०
इसकी छाया ने तथा मजबूत देवदार की शाखाओं ने, पर्वतों को ढंक लिया था.
११
वह अपनी शाखाएं समुद्र तक, तथा किशलय नदी तक फैली हुई थी.
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