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स्तोत्र ७३:४-६

स्तोत्र ७३:४-६

मृत्यु तक उनमें पीड़ा के प्रति कोई संवेदना न थी; उनकी देह स्वस्थ तथा बलवान थी.
उन्हें अन्य मनुष्यों के समान सामान्य समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता; उन्हें परिश्रम भी नहीं करना पड़ता.
अहंकार उनके गले का हार है; तथा हिंसा उनका वस्त्र.
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